Sunday, February 04, 2018

प्रेम, धर्म-जाति और ऑनर किलिंग

ऑनर किलिंग के ज़्यादातर मामले में, धर्म और जाति में अन्तर होता है। अंतरजातीय और अंतर्धार्मिक प्रेम/ विवाह को ज्यादातर माँ-बाप, परिवार और समाज नहीं पचा पाते। धर्म और जाति आधारित भेद और हिंसा को आप जितना ढाँपना है ढाँपिये। ..पर वह बार-बार सड़े घाव की तरह मवाद बन कर निकल आएगा। कुछ लोग जो कह रहे हैं कि यह हिन्दू-मुसलमान या कभी कहते हैं जाति भेद की बात नहीं है। वे उसी घाव को ढाँप रहे हैं। संभव है, इससे क्षणिक सफलता भी मिले। हाँ! धार्मिक विद्वेष फैलाने से बचना चाहिए। ..पर लोगों के दिमाग में इतनी नफरत भरी है (अथवा भर दी गयी है), कि इसे कहीं भी और कभी भी आसानी से भड़काया जा सकता है। हम जब तक जाति और धर्म का ईलाज नहीं करते, भारत में यह जारी रहेगा।

भारत के साथ जो कई धर्मों की विविधता एक विशेषता की तरह देखी जाती है। वह उसकी कमजोरी भी है। ऐसे में संघ जैसे से संगठन आग में घी की तरह काम करते हैं।
इस समस्या का समाधान धर्म-संप्रदाय से मुक्त शिक्षा को समाज में लागू करना हो सकता है। तर्क करना, विज्ञान की बात करना प्राथमिकता में हो। आज संवाद के कई केंद्र बनाने की जरूरत है। जहाँ युवा पुरुष-स्त्री जाति-धर्म से ऊपर उठकर संवाद कर सकें और स्वंय से व्यक्तिगत अथवा सामूहिक रूप से कई समस्यायों के समाधान निकाल सकें।
इसके अतिरिक्त उसी संवाद, चिंतन और परिवर्तन की प्रक्रिया में अपने लिए जीवन साथी भी चुन सकें। धार्मिक विद्वेष और जाति भेद आज के भारत की सच्चाई है। इसे पहले स्वीकार कीजीये। तभी समाधान की दिशा में, आगे बढ़ना संभव होगा।